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The Poetic Land

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Memories

32 writings · page 1 of 2

Poem

गिरमिट की चिट्ठी – शैलेन्द्र बूधन

by Shailendra Boodhun · शैलेन्द्र बूधन

परदादा की कोई चिट्ठी नहीं है। वे लिखना नहीं जानते थे, सिर्फ़ गन्ना काटना जानते थे, और रामायण की चौपाइयाँ, जो उन्होंने आरा के किसी गाँव से जहाज़ पर …

Nov 1, 2026
Poem

आधा गीत – शैलेन्द्र बूधन

by Shailendra Boodhun · शैलेन्द्र बूधन

दादी कहती थीं, गन्ने में मीठा धूप से नहीं, पसीने से आता है। कटाई के मौसम में वे सुबह चार बजे हँसिया उठातीं और पोर-पोर में भोजपुरी का एक गीत गुनगुनाती …

Nov 1, 2026
Poem

मुट्ठी भर नमक – मोहन लाल बिष्ट

by Mohan Lal Bisht · मोहन लाल बिष्ट

शेफ़ ने सिखाया— नमक आख़िर में डालो, चखकर, ज़रूरत भर। माँ के चूल्हे पर नमक पहले पड़ता था, अंदाज़े से, मुट्ठी भर, और कभी ग़लत नहीं होता था। बारह साल हो …

Nov 1, 2026
Poem

पहाड़ की क्षणिकाएँ – अनुराधा सेमवाल

by Anuradha Semwal · अनुराधा सेमवाल

धुंध ने पूरा पहाड़ ढक लिया, बस मंदिर की घंटी बाहर रह गई। यह पगडंडी इतनी पुरानी है कि अब पैरों को नहीं, यादों को ढोती है। रात भर बर्फ़ गिरी— सुबह आँगन …

Nov 1, 2026
Story

बैलों के नाम — Anirudh Kalhans

by Anirudh Kalhans · अनिरुद्ध कलहंस

ग्वालियर-गोहद के रास्ते की सबसे तेज़ बैलगाड़ी के मालिक भग्गा की रोज़ी नई छोटी रेल छीन रही है। अभिमान में वह रेल से रेस लगाता है, और उस दिन इंजन पर बैठा है उसके अपने ज़िले का एक जवान ड्राइवर।

Nov 1, 2026

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