दादी कहती थीं,
गन्ने में मीठा
धूप से नहीं,
पसीने से आता है।
कटाई के मौसम में
वे सुबह चार बजे
हँसिया उठातीं
और पोर-पोर में
भोजपुरी का एक गीत
गुनगुनाती जातीं,
जिसका आधा हिस्सा
उन्हें भी याद नहीं था।
आज खेत में
मशीन चलती है।
शोर इतना है
कि कोई गीत
सुनाई नहीं देता।
पर कभी-कभी
हवा चलती है
गन्ने की पत्तियों से होकर,
सरसराती हुई,
और मुझे लगता है
वह भूला हुआ आधा गीत
खेत को
अब भी याद है।
Hindi · हिन्दी





