Skip to main content

The Poetic Land

TYPE AT LEAST 3 CHARACTERS TO SEARCH...

Tag

Work

26 writings · page 1 of 2

Story

পেঞ্চন — ৰুকচানা য়াছমিন হাজৰিকা

by Ruksana Yasmin Hazarika · ৰুকচানা য়াছমিন হাজৰিকা

প্ৰতি মাহৰ প্ৰথম কামৰ দিনটোত দহ বাজি পোন্ধৰ মিনিটত বিৰাশী বছৰীয়া জোনাকী বৰগোহাঁই শিৱসাগৰৰ বেংকলৈ আহে পেঞ্চন চাবলৈ। কেতিয়াও এটা টকাও নোতোলে।

Nov 1, 2026
Poem

फ़ाइल महारानी – राजीव रंजन केसरी

by Rajiv Ranjan Kesri · राजीव रंजन केसरी

हमारे दफ़्तर में एक फ़ाइल है— उम्र में मुझसे बड़ी, पद में बड़े साहब से भी बड़ी। उसे कोई उठाता नहीं, बस आगे बढ़ाता है। "देख लें", "उचित कार्यवाही …

Nov 1, 2026
Story

ডাক্তৰৰ লাও — ভাস্কৰজ্যোতি গগৈ

by Bhaskarjyoti Gogoi · ভাস্কৰজ্যোতি গগৈ

চৰুপথাৰ লাইনত দিনটোৰ শেষৰ ফালে এজন মেডিকেল ৰিপ্ৰেজেণ্টেটিভে লগ পায় এজন বুঢ়া গাঁৱলীয়া ডাক্তৰক, যাৰ ৰেজিষ্ট্ৰেচনৰ কাগজ উঁইয়ে খাইছে।

Nov 1, 2026
Story

अँगूठा भी लगा दिया है — Sanchali Dahiya

by Sanchali Dahiya · संचाली दहिया

कॉपी से फाड़ा एक पन्ना, कोने में कार्टून हाथी, और ग्यारह साल से सातवीं मंज़िल का पोछा लगाने वाली रामवती का इस्तीफ़ा। एक चिट्ठी जो जितनी औपचारिक है, उतनी ही मज़ेदार, और उतनी ही चुभने वाली।

Nov 1, 2026
Poem

मुट्ठी भर नमक – मोहन लाल बिष्ट

by Mohan Lal Bisht · मोहन लाल बिष्ट

शेफ़ ने सिखाया— नमक आख़िर में डालो, चखकर, ज़रूरत भर। माँ के चूल्हे पर नमक पहले पड़ता था, अंदाज़े से, मुट्ठी भर, और कभी ग़लत नहीं होता था। बारह साल हो …

Nov 1, 2026
Story

अनुरोग — Rohitashva Bhanot

by Rohitashva Bhanot · रोहिताश्व भनोट

कानपुर के नयागंज की एक प्रेस में एक शादी के कार्ड पर खानदान भर की लड़ाई — किसका नाम ऊपर, किसका नीचे, कनाडा वाला भाई आए या न आए — और आख़िर में एक ऐसी ग़लती जो सबसे प्यारा मज़ाक बन गई।

Nov 1, 2026
Poem

डिलीवरी – प्रखर नागवंशी

by Prakhar Nagvanshi · प्रखर नागवंशी

रात के ग्यारह बजे मैं तुम्हारे दरवाज़े पर खड़ा हूँ तुम्हारी बिरयानी लेकर, और तुम दरवाज़ा आधा खोलकर हाथ बढ़ाते हो, बिना देखे। तुम्हें नहीं पता कि इस …

Nov 1, 2026
Poem

इजा को चिट्ठी, दुबई से – मोहन लाल बिष्ट

by Mohan Lal Bisht · मोहन लाल बिष्ट

इजा, यहाँ सब ठीक है। होटल बहुत बड़ा है, इतना कि उसकी लॉबी में अपना पूरा गाँव दो बार समा जाए। रोज़ तीन सौ लोगों का खाना बनाता हूँ— पास्ता, सुशी, न …

Nov 1, 2026
Poem

रात की ड्यूटी – ज्योति मिंज

by Jyoti Minj · ज्योति मिंज

रात दो बजे वार्ड नंबर सात में सिर्फ़ दो चीज़ें जागती हैं— मॉनिटर की हरी लकीर और मैं। बेड नंबर चार की अम्मा नींद में अपने बेटे का नाम लेती हैं, जो दिन …

Nov 1, 2026

Explore all writings →