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The Poetic Land

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Mountains

17 writings

Story

ৰাস্তাই যিমান দিয়ে — সুদেষ্ণা নাথ

by Sudeshna Nath · সুদেষ্ণা নাথ

শিলচৰৰ পৰা গুৱাহাটীলৈ যোৱা নাইট বাছখন মেঘালয়ৰ পাহাৰত পাহাৰ খহি ৰৈ গ'ল। বাছত এজন ল'ৰা, যাৰ পিছদিনা ৰাতিপুৱা ন বজাত মেডিকেলৰ প্ৰৱেশ পৰীক্ষা।

Nov 3, 2026
Story

कोठीधार — Nilanjana Thapliyal

by Nilanjana Thapliyal · नीलांजना थपलियाल

सोलन लौट रहे मास्टर देवीदत्त की गाड़ी हर सुरंग के बाद एक ही अनजाने हॉल्ट पर आकर रुकती है। डिब्बा ख़ाली होता जाता है, और सामने बैठी नीले पिनाफ़ोर वाली लड़की का धीरज किसी दस साल के बच्चे का नहीं लगता।

Nov 1, 2026
Poem

पहाड़ की क्षणिकाएँ – अनुराधा सेमवाल

by Anuradha Semwal · अनुराधा सेमवाल

धुंध ने पूरा पहाड़ ढक लिया, बस मंदिर की घंटी बाहर रह गई। यह पगडंडी इतनी पुरानी है कि अब पैरों को नहीं, यादों को ढोती है। रात भर बर्फ़ गिरी— सुबह आँगन …

Nov 1, 2026
Poem

तालों का गाँव – अनुराधा सेमवाल

by Anuradha Semwal · अनुराधा सेमवाल

हमारे गाँव में अब सबसे ज़्यादा आबादी तालों की है। हर दरवाज़े पर एक जंग खाया ताला, जैसे किसी ने घर को चुप रहने की क़सम दिला दी हो। आँगन में उग आई है …

Nov 1, 2026
Poem

पिरूल – अनुराधा सेमवाल

by Anuradha Semwal · अनुराधा सेमवाल

जेठ आते ही चीड़ गिरा देता है अपनी सूखी पत्तियाँ, जैसे कोई थका हुआ आदमी उतार दे अपनी कमीज़। पिरूल— ढलानों पर बिछा भूरा सोना, आग से बस एक तीली भर दूर। …

Nov 1, 2026
Story

घसियारी गाँठ — Nilanjana Thapliyal

by Nilanjana Thapliyal · नीलांजना थपलियाल

बत्तीस बरस से फ़ाइलें संभालने वाली सुनंदा को एक दिन एक सौ चौदह साल पुराने बस्ते की गाँठ बदली हुई मिलती है। धुंध भरे एक हफ़्ते में वह जाल बिछाती है, और रात के अँधेरे में पिछले दरवाज़े पर चाबी घूमती है।

Nov 1, 2026

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