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The Poetic Land

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सेल्फ़ी-काल

By Rajiv Ranjan Kesri · राजीव रंजन केसरी

पहले लोग
तीर्थ जाते थे पुण्य कमाने,
अब जाते हैं
नेटवर्क ढूँढ़ने।

घाट पर एक सज्जन
डुबकी से पहले
तीन बार पोज़ बदलते हैं—
एक आस्था वाला,
एक “ब्लेस्ड” वाला,
एक फ़िल्टर वाला।

शादी में दूल्हा
फेरे लेते-लेते
कैमरामैन से पूछता है,
“भैया, सातवाँ वाला
दोबारा ले लें?”

अस्पताल में मरीज़ से मिलने आए रिश्तेदार
फल कम,
फ़्रंट कैमरा ज़्यादा लाते हैं।
“गेट वेल सून” लिखने के लिए
मरीज़ का थोड़ा मुस्कुराना
ज़रूरी है।

पड़ोस के चाचा,
जिन्हें किसी ने कभी हँसते नहीं देखा,
अब हर सुबह
गुड मॉर्निंग के फूल भेजते हैं—
सत्तर लोगों को,
एक साथ,
बिना देखे।

और मैं?
मैं यह कविता लिखकर
सबसे पहले यही देखूँगा
कि कितने लाइक आए।

व्यंग्य का सबसे बड़ा दुख यही है, भाई—
आईना दिखाते-दिखाते
अपना चेहरा भी
उसी में दिख जाता है।

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About the Poet

Rajiv Ranjan Kesri is a senior clerk in a district electricity office in Patna. His vyangya poems laugh at files, selfies and everyday absurdities, and he insists he is usually the first target of his own satire.

राजीव रंजन केसरी पटना के एक ज़िला बिजली कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक हैं। उनकी व्यंग्य कविताएँ फ़ाइलों, सेल्फ़ियों और रोज़मर्रा की बेतुकी बातों पर हँसती हैं, और वे कहते हैं कि उनके व्यंग्य का पहला निशाना अक्सर वे ख़ुद होते हैं।

📍 Patna, Bihar, India
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