Skip to main content

The Poetic Land

TYPE AT LEAST 3 CHARACTERS TO SEARCH...

Tag

Satire

9 writings

Article

মনুষ্য ফল – বঙ্কিমচন্দ্র চট্টোপাধ্যায়

আফিমের একটু বেশী মাত্রা চড়াইলে, আমার বোধ হয়, মনুষ্য সকল ফল বিশেষ—মায়াবৃন্তে সংসার-বৃক্ষে ঝুলিয়া রহিয়াছে, পাকিলেই পড়িয়া যাইবে। সকলগুলি পাকিতে পায় না—কতক…

Nov 3, 2026
Poem

फ़ाइल महारानी – राजीव रंजन केसरी

by Rajiv Ranjan Kesri · राजीव रंजन केसरी

हमारे दफ़्तर में एक फ़ाइल है— उम्र में मुझसे बड़ी, पद में बड़े साहब से भी बड़ी। उसे कोई उठाता नहीं, बस आगे बढ़ाता है। "देख लें", "उचित कार्यवाही …

Nov 1, 2026
Poem

सेल्फ़ी-काल – राजीव रंजन केसरी

by Rajiv Ranjan Kesri · राजीव रंजन केसरी

पहले लोग तीर्थ जाते थे पुण्य कमाने, अब जाते हैं नेटवर्क ढूँढ़ने। घाट पर एक सज्जन डुबकी से पहले तीन बार पोज़ बदलते हैं— एक आस्था वाला, एक "ब्लेस्ड" …

Nov 1, 2026
Story

गड्ढा श्री का जन्मोत्सव — Rohitashva Bhanot

by Rohitashva Bhanot · रोहिताश्व भनोट

फूलबाग़ के पीछे प्रेस चलाने वाले एक बेहद शांत आदमी की ज़ुबानी उस गड्ढे का क़िस्सा, जिसे कानपुर ने भरना नहीं, पूजना सीखा — अध्ययन समिति, यूट्यूबर, चाय का ठेला और बर्थडे केक समेत।

Nov 1, 2026

Explore all writings →