मेरा काम है
लोगों के रास्ते आसान करना।
स्क्रीन पर बटन कहाँ हो,
कितना बड़ा हो,
किस रंग का हो
कि कोई भी
बिना झिझके
उसे छू सके।
मीटिंग में कहते हैं—
“यूज़र को कभी
रुकना नहीं चाहिए।”
मैं सिर हिलाती हूँ
और मुझे दादी याद आती हैं।
दादी को
गाँव के बड़े कुएँ तक
जाने की इजाज़त नहीं थी।
वे घड़ा लेकर
दूर वाली बावड़ी तक जातीं,
दो कोस,
सिर पर पानी,
आँखों में चुप।
उन्होंने कभी नहीं कहा
कि उन्हें बुरा लगा।
बस इतना कहती थीं—
“पानी तो पानी है, लली,
प्यास सबकी एक-सी।”
आज मेरा डिज़ाइन
चालीस लाख फ़ोनों पर खुलता है।
हर बार जब कोई
बिना रुके
एक बटन दबाता है,
मैं सोचती हूँ—
यह दरवाज़ा
सबके लिए खुला है न?
मेरे लैपटॉप के कोने में
दादी की एक पुरानी फ़ोटो चिपकी है।
सहकर्मी पूछते हैं, “कौन?”
मैं कहती हूँ,
“मेरी पहली डिज़ाइन टीचर।”
Hindi · हिन्दी





