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The Poetic Land

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21 writings

Poem

मुट्ठी भर नमक – मोहन लाल बिष्ट

by Mohan Lal Bisht · मोहन लाल बिष्ट

शेफ़ ने सिखाया— नमक आख़िर में डालो, चखकर, ज़रूरत भर। माँ के चूल्हे पर नमक पहले पड़ता था, अंदाज़े से, मुट्ठी भर, और कभी ग़लत नहीं होता था। बारह साल हो …

Nov 1, 2026
Story

मसालेदानी के सहारे — Prabhjot Bhanwala

by Prabhjot Bhanwala · प्रभजोत भनवाला

लेस्टर की एक रसोई, मसालेदानी से टिका फ़ोन, उस पार अंबाला से बेबे की आवाज़ — और कढ़ी जो कभी फटती है, कभी जलती है। एक पिता, अंग्रेज़ी बोलने वाला पंद्रह साल का बेटा, और सात रविवार।

Nov 1, 2026
Story

चार नंबर की मशीन — Mrinmayi Raghuvanshi

by Mrinmayi Raghuvanshi · मृण्मयी रघुवंशी

भोपाल की रेवा और पटना का प्रियांशु, दोनों घर से दूर, बेंगलुरु की एक लॉन्ड्री में हर इतवार मिलते हैं। मशीन के झगड़े से शुरू हुई बातें माँओं के फ़ोन, घर के खाने और सीखी हुई कन्नड़ तक पहुँचती हैं।

Nov 1, 2026
Poem

तालों का गाँव – अनुराधा सेमवाल

by Anuradha Semwal · अनुराधा सेमवाल

हमारे गाँव में अब सबसे ज़्यादा आबादी तालों की है। हर दरवाज़े पर एक जंग खाया ताला, जैसे किसी ने घर को चुप रहने की क़सम दिला दी हो। आँगन में उग आई है …

Nov 1, 2026
Story

अपना खाता — Kavyanjali Mehrotra

by Kavyanjali Mehrotra · काव्यांजलि मेहरोत्रा

लखनऊ के रकाबगंज में अठहत्तर बरस की अम्मा ने पुश्तैनी घर बेचने का ऐलान किया है। गुड़गाँव, कानपुर और लखनऊ से आए तीनों बच्चों के अपने-अपने हिसाब हैं, पर असली बही अम्मा के पास है।

Nov 1, 2026

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