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The Poetic Land

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डिलीवरी

By Prakhar Nagvanshi · प्रखर नागवंशी

रात के ग्यारह बजे
मैं तुम्हारे दरवाज़े पर खड़ा हूँ
तुम्हारी बिरयानी लेकर,
और तुम
दरवाज़ा आधा खोलकर
हाथ बढ़ाते हो,
बिना देखे।

तुम्हें नहीं पता
कि इस बिरयानी के साथ
मैं क्या-क्या लाया हूँ—
लक्ष्मी नगर का जाम,
आईटीओ की बारिश,
एक कुत्ता जो तीन गलियों तक
मेरे पीछे भौंका,
और माँ का मिस्ड कॉल,
जिसे मैंने
लाल बत्ती पर
“बाद में” कह दिया।

तुम रेटिंग दोगे—
चार स्टार,
क्योंकि रायता
थोड़ा गिर गया था।

मैं दिन में
हिंदी में एमए करता हूँ,
मुक्तिबोध पढ़ता हूँ—
“अब अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे
उठाने ही होंगे”—
और रात को
ऐप की नीली स्क्रीन पर
अगले ऑर्डर का इंतज़ार करता हूँ।

कभी किसी दरवाज़े पर
कोई कहता है,
“भैया, पानी पिओगे?”
उस दिन
मैं पाँच स्टार
अपने आप को देता हूँ,
और उस शहर को भी
जो कभी-कभी
इंसान बन जाता है।

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About the Poet

Prakhar Nagvanshi is from Gorakhpur and is studying for an MA in Hindi at Delhi University while working evenings as a food-delivery rider. His raw free verse is written between orders, on the back of a city that rarely looks up.

प्रखर नागवंशी गोरखपुर से हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी में एमए कर रहे हैं, साथ ही शाम को फ़ूड-डिलीवरी राइडर का काम करते हैं। उनकी बेलौस मुक्त छंद कविताएँ ऑर्डरों के बीच, उस शहर की पीठ पर लिखी जाती हैं जो कम ही नज़र उठाकर देखता है।

📍 Delhi, India (from Gorakhpur)
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