तुझे लिखूँ, हर शाम लिखूँ,
हाल-ए-दिल तमाम लिखूँ।
लिखूँ कि तू है इक ग़ज़ल जैसा,
हर हर्फ़ में तेरा ज़िक्र-ए-आम लिखूँ।
आईना देख सोचूँ — तेरा दीदार हो,
ये सिंगार में तेरे नाम लिखूँ।
तुझे चाहूँ कि तू मेरे ख़ुदा जैसा,
मैं अपने नाम के साथ
तेरा आख़िरी नाम लिखूँ।