तुम्हारी याद भी अजीब मेहमान है,
बिना बताए आती है और जाने का नाम नहीं लेती।
Heartlines · Hindi
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तुम्हारी याद भी अजीब मेहमान है,
बिना बताए आती है और जाने का नाम नहीं लेती।
मिट्टी की ख़ुशबू ने आज फिर याद दिलाया,
कि मैं शहर में हूँ, पर दिल अब भी गाँव में है।
टूटा हूँ, पर बिखरा नहीं,
अभी कुछ ख़्वाब बाक़ी हैं जिन्हें जोड़ना है।
आईना रोज़ वही चेहरा दिखाता है,
बस आँखों की थकान हर रोज़ नई होती है।
पुराने मोहल्ले की गलियाँ अब भी मुझे पहचानती हैं,
बस अब वहाँ कोई मेरा नाम नहीं पुकारता।
छोटी-छोटी ख़ुशियाँ जेब में रखा करो,
बड़े दिन अक्सर देर से आते हैं।
सुबह की पहली धूप ने कंधे पर हाथ रखा,
और कहा: चलो, आज फिर से कोशिश करते हैं।
कुछ रिश्ते बोलने से नहीं,
चुप रहकर साथ बैठने से गहरे होते हैं।
यहाँ हर किसी को दरारों में झाँकने की आदत है,
दरवाज़े खोल दो, कोई पूछने भी नहीं आएगा।
थक कर बैठ जाना भी सफ़र का हिस्सा है,
बस उठना याद रखना, मंज़िल अब भी राह देख रही है।
माँ के हाथ की रोटी में नमक कम था,
पर वो ज़ायका आज तक किसी होटल में नहीं मिला।
लफ़्ज़ों के दाँत नहीं होते, पर ये काट लेते हैं,
दीवारें खड़ी किए बग़ैर ही बाँट देते हैं।
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