मिट्टी की ख़ुशबू ने आज फिर याद दिलाया,
कि मैं शहर में हूँ, पर दिल अब भी गाँव में है।
Heartlines · Hindi
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मिट्टी की ख़ुशबू ने आज फिर याद दिलाया,
कि मैं शहर में हूँ, पर दिल अब भी गाँव में है।
पुराने मोहल्ले की गलियाँ अब भी मुझे पहचानती हैं,
बस अब वहाँ कोई मेरा नाम नहीं पुकारता।
माँ के हाथ की रोटी में नमक कम था,
पर वो ज़ायका आज तक किसी होटल में नहीं मिला।
घर से निकला था कुछ बनने के लिए,
अब हर शाम बस घर लौटने का मन करता है।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती
'अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!'
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