आज कुछ भी न कहो, बस ये बरसात होने दो,
बिना कहे ही सही, थोड़ी सी बात होने दो।
घड़ी की सुइयों को रोको किसी बहाने से,
ज़रा सी देर ज़माने को मात होने दो।
बहुत सँभल के जिए हम तमाम उम्र मियाँ,
कभी-कभार तो दिल की ख़ुराफ़ात होने दो।
जो ख़त अधूरे रहे, आज फाड़ना मत तुम,
उन्हें भी प्यार की कोई सौग़ात होने दो।
बहुत दिनों से फ़क़त फ़ोन पर ही मिलते हैं,
कभी तो चाय पे भी इक मुलाक़ात होने दो।
‘शफ़क़’ बड़े तालाब पे उतरी है शाम अभी,
सुनो, ठहर भी जाओ, ये रात होने दो।





