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The Poetic Land

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Wisdom

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Poem

निर्मोही के दोहे – रामेश्वर दुबे ‘निर्मोही’

by Rameshwar Dubey 'Nirmohi' · रामेश्वर दुबे 'निर्मोही'

संगम तट पर बैठकर, देखा जल का खेल। गंगा जमुना यूँ मिलीं, ज्यों बिछड़ों का मेल॥ माटी का दीपक जला, आँगन भया उजास। बिटिया पढ़ने को चली, माँ की बढ़ी …

Nov 1, 2026

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