क्यों इतना तुम जो सता रहे हो,
क्यों मेरे दिल को रुला रहे हो।
ज़ख़्मों को क्यों छेड़े जा रहे हो
क्यों मेरा दर्द और बढ़ा रहे हो।
मेरी आँखों में क्या देखते हो
जो नज़रें मुझसे चुरा रहे हो
मेरे दिल की बात जानते हो
फिर क्यों मझसे पूछे जा रहे हो
दिल को मेरे याद आ रहे हो,
क्यों ख़्वाबों में आते जा रहे हो,
अपना ग़म जनते हो मुस्तफ़ा तुम
फिर क्यों इतना मुस्कुरा रहे हो।
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badhiya