आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा,
जब तुझे याद किया, ख़ुद को बिखरते देखा।
तेरी तस्वीर को सीने से लगा कर अक्सर,
मेरे हर आँसू को चुपके से उतरते देखा
हमने चाहा था तुझे उम्रभर अपना रखना,
आज उसको मेरी आँखों से मुकरते देखा।
जब भी तन्हाई में आँखों को ज़रा बंद किया
हर तरफ़ बस तेरा ही चेहरा उभरते देखा।
जिसके आने से कभी दिल में बहार आती थी,
आज उसी को मेरी दुनिया से गुज़रते देखा।
मुस्तफ़ा ने भी तुझे दिल से भुलाना चाहा,
हर दफ़ा ख़ुद को तेरी याद में मरते देखा।