किससे अपनी फ़रियाद करूँ,
किसको इस दौर में याद करूँ।
जो अपना था, वही दूर हुआ,
किसके लिए दिल आबाद करूँ
जिसके बिन हर ख़ुशी वीराँ है,
उसके बिन किसको शाद करूँ।
तेरी हर सू यादें बसी है,
खुद को कैसे आज़ाद करूँ।
हर रात में तेरा साया है,
हर ख़्वाब में तेरी मुराद करूँ।
अब कूच बचा नहीं मुस्तफा तो
मैं क्या किसी की इमदाद करूँ।