अरसे-दराज़ के बाद जब तुझे देखना होगा,
अश्क़ आँखों में लेकर चेहरे पे हँसना होगा।
दीवाना कहकर मुझे ज़माने ने पुकारा होगा,
जब सुनाया जिसने तेरी याद का अफ़साना होगा।
मुद्दतों बाद भी तेरा आशियाना होगा,
हम रहे न रहे पर तेरा ठिकाना होगा।
हिफ़्ज़-ए-जाँ ही नहीं, जान से गुज़रना होगा,
तुझको पाने के लिए क्या फिर मुझे मरना होगा।
कैसा दर्द है ये सोचकर तुझको भूलना होगा,
क्या बेबसी है जिसमें ग़म से गुज़रना होगा।
क्या कहा मुस्तफ़ा कि तुझे उससे भूलना होगा,
ये मुमकिन ही नहीं, क्या सोच के तेरे कहना होगा।