कभी सोचा है,
टूटा तारा अपनी मुराद कैसे पूरी करेगा,
चाँद कैसे किसी की बात सुनेगा,
बारिश कैसे प्यार का रूप बनेगी,
संगीत कैसे किसी को ख़ुशी पहुँचाएगा,
और कैसे बेचैन इंसान
मंदिर जाकर सुकून पाएगा?पर फिर भी हम मानते हैं,
क्योंकि दुनिया आस रखना जानती हैआस ही तो है
जो दिल में रोशनी कर दे,
मुर्दे में ज़िंदा होने की हिम्मत भर दे,
टूटे को मज़बूत बनने का सहारा दे,
और डूबे को एक किनारा दे।कोई मिलेगा—
ये भी तो एक आस है,
कल अच्छा होगा—
ये उसकी का भाव है।लिखने वालों की ज़िंदगी में
ये ख़ास एहसास है—
कोई पढ़ेगा उन्हें,
और सीखेगा उनके लिखे विचारों से,
ये भी तो उम्मीद होने का आग़ाज़ है।ये आस ऐसी है
कि बिछड़े को भी फिर मिला दे,
बंजर ज़मीन पर फूल खिला दे,
काली रात के बाद
तुमको सवेरा दिखा दे।यही तो वो आस है
जो तुम्हें
ख़ुद से सही मायने में
मिला दे।